Monday, June 1, 2020

क़त्ल करने का मुझे, इरादा हो तुम्हरा तो बता देना

क़त्ल करने का मुझे, इरादा हो तुम्हरा तो बता देना
अभी फुर्सत में बैठा हूं, तुम्हारा टाइम पास हो जाएगा

मैं नहीं कुछ ख़ास हूं, एक बूंद हूं बस पानी की
अभी बरसा हूं बस थोड़ा सा, तुम्हें मुस्कुराना हो तो बता देना 

Monday, April 13, 2020

आंखों को नींद ना आए, बेचेन हो जाए


आंखों को नींद ना आए, बेचेन हो जाए
ख्याल मिलने का भी दिल से ना जाए

गुजरगई वो बातें, वो बीते दिन की यादें
वफा से निभाई तूने बेवफाई की यादें

वो कौन वक्त था जो हमें मिला गया
उस मौड़ से गुजरा वो वक्त रूला गया 

तेरी बात, उदास रात की दास्तान सुनाएगी
ऐसे छोड़कर जाने वाले तेरी बहुत याद आएगी

जहां से आया था वो लौट रहा है वापस 
'मुस्तकीम' इस मोड़ पर ना आएगा वापस 

Saturday, March 14, 2020

बिछड़ जाने का तुम्हें दुख लगे तो, क़ैद में ही रखना

बिछड़ जाने का तुम्हें दुख लगे तो, क़ैद में ही रखना
दरिया -ए-रेत को बहना में वक्त नहीं लगता

बेहतर तो ये है कि नजरों की क़ैद में ही रहें हम खुद
हम वो वक्फा हैं जिसे गुजरने में लम्हा भी काफी है


चलो माना बिछड़ भी गए तो क्या होगा
मैं इधर-तुम उधर, बीच में फासला होगा

हम कह देंगे फासलों को भी,एक दौर है तू
जो गुजरा वो हमारा था, जो आएगा वो भी हमारा होगा


माना कि ऐब हैं तुम्हारे अंदर
मगर कोई कमी थोड़ी है

ये पानी है जनाब, शराब थोड़ी है
कर लो अभी जो करना है
मोहतरमा सुधरने की ये कोई उम्र थोड़ी है

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अभी अधेंरा है उधर, उजाले में मिलेंगे हम
बात तो जिल में है, वहीं रहने दो
बस इशारों - इशारों में लड़ेंगे हम

Wednesday, April 11, 2012

मेरे दुश्मनों से मेरी दोस्ती हो गई


मेरे दुश्मनों से मेरी दोस्ती हो गई
उम्र छोटी थी मेरी बड़ी हो गई
वक्त बदलने लगा मेरा भी
सफर में अकेला था किसी से दोस्ती हो गई
चाहत जागी दिल में उनसे मिलने की
देखा उनकी रुखसती हो गई
बेघर ,परवाना मुसाफिर बन गया मुस्तकीम
अब तो जीवन में दोस्तों की भी कमी हो गई

Monday, April 9, 2012

मेरा शहर,मेरा गीत, तेरे ही शान से मेरा है नाम


तुझको सलाम ..मेरा है काम
तेरे ही शान से मेरा है नाम
तू आगरा की शान है
हमारी पहचान है
मैं ख्याल हुं किसी का
मैं सवाल हुं उसी का
मुझे आरजू है इसकी
मुझे जुस्तजू है जिसकी
मेरा शहर का हाल है ये
शाहजहां का कमाल है ये
जब खयाले दिल दौड़ता है
हर गली मोहल्ले को पीछे छोड़ता है
तुझको सलाम ..मेरा है काम
तेरे ही शान से मेरा है नाम
तू आगरा की शान है
हमारी पहचान है
तुझको सलाम ..मेरा है काम
तेरे ही शान से मेरा है नाम
तू आगरा की शान है
हमारी पहचान है
देख लो मुझको जी भर के
पल की कोई ख़बर नहीं..
मेरी जान मेरा मान...
मेरा ताज मेरी पहचान
तुझको सलाम ..मेरा है काम
तेरे ही शान से मेरा है नाम
तू आगरा की शान है
हमारी पहचान है
मन ये मेरा कहना लगा है
गहरा ये वादा मेंने किया है
रातों की हलचल ......
अब बढ़ने लगी है
मेरी ज़िन्दगी जलने लगी है
धूल जिंदगी पर जमने लगी है
शबनम की बूंदे उड़ने लगी है....
तेरा ये दामन छूट रहा है
खुद ख़ुदा भी रुठ गया है
तेरा ये दामन छूट रहा है
तुझको सलाम ..मेरा है काम
तेरे ही शान से मेरा है नाम
तू आगरा की शान है
हमारी पहचान है
तुझको सलाम ..मेरा ये है काम
तेरे ही शान से मेरा है नाम
तू आगरा की शान है
हमारी पहचान है
हमारी पहचान है
हमारी पहचान है

Wednesday, November 16, 2011

मेरी हर गजल दिवानी तेरी



मेरी हर गजल दिवानी तेरी
तुझसे शुरु. तुझपे खत्म कहानी मेरी
तेरी इबादत से ...... जिंदगानी मेरी
करु क्या अब में.. किस्सा तेरा बयां
मेरे लबों पर है.... सिर्फ कहानी तेरी
मेरे दिल में जिक्र हेमशा तेरा
मेरी तो बस .....मेरी कहानी मेरी
दरों शहर तेरा.....अजनबी में
तेरे दर पर खत्म कहानी मेरी
तलब क्या करु तुझसे ......
मेरी हर गजल दिवानी तेरी


Thursday, October 27, 2011

जब कोई ख्याल दिल से टकराता है


जब कोई ख्याल दिल से टकराता है ॥
दिल ना चाह कर भी, खामोश रह जाता है ॥
कोई सब कुछ कहकर, प्यार जताता है॥
कोई कुछ ना कहकर भी, सब बोल जाता है ॥

एक टूटी हुई जंजीर की फरियाद हैं हम
और दुनिया ये समझती है कि आजाद हैं हम

देख लो आज हमको जी भर के
कोई आता नहीं है फिर यहां मर के

अब क्या बताऊं मैं तेरे मिलने से क्या मिला
इरफान-ए-गम हुआ मुझे दिल का पता मिला
जब भी निकलता हूं मैख़ाने से,अकेला नहीं होता
तेरी यादों का पतझड़ मेरे साथ चलता है..

इश्क किया चीज़ है ख़बर न थी हमको

इश्क किया चीज़ है ख़बर न थी हमको अब ग़ालिब तेरे शहर ने जीना सिख़ा दिया