Thursday, October 27, 2011

जब कोई ख्याल दिल से टकराता है


जब कोई ख्याल दिल से टकराता है ॥
दिल ना चाह कर भी, खामोश रह जाता है ॥
कोई सब कुछ कहकर, प्यार जताता है॥
कोई कुछ ना कहकर भी, सब बोल जाता है ॥

एक टूटी हुई जंजीर की फरियाद हैं हम
और दुनिया ये समझती है कि आजाद हैं हम

देख लो आज हमको जी भर के
कोई आता नहीं है फिर यहां मर के

अब क्या बताऊं मैं तेरे मिलने से क्या मिला
इरफान-ए-गम हुआ मुझे दिल का पता मिला
जब भी निकलता हूं मैख़ाने से,अकेला नहीं होता
तेरी यादों का पतझड़ मेरे साथ चलता है..

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इश्क किया चीज़ है ख़बर न थी हमको

इश्क किया चीज़ है ख़बर न थी हमको अब ग़ालिब तेरे शहर ने जीना सिख़ा दिया