Monday, April 9, 2012

मेरा शहर,मेरा गीत, तेरे ही शान से मेरा है नाम


तुझको सलाम ..मेरा है काम
तेरे ही शान से मेरा है नाम
तू आगरा की शान है
हमारी पहचान है
मैं ख्याल हुं किसी का
मैं सवाल हुं उसी का
मुझे आरजू है इसकी
मुझे जुस्तजू है जिसकी
मेरा शहर का हाल है ये
शाहजहां का कमाल है ये
जब खयाले दिल दौड़ता है
हर गली मोहल्ले को पीछे छोड़ता है
तुझको सलाम ..मेरा है काम
तेरे ही शान से मेरा है नाम
तू आगरा की शान है
हमारी पहचान है
तुझको सलाम ..मेरा है काम
तेरे ही शान से मेरा है नाम
तू आगरा की शान है
हमारी पहचान है
देख लो मुझको जी भर के
पल की कोई ख़बर नहीं..
मेरी जान मेरा मान...
मेरा ताज मेरी पहचान
तुझको सलाम ..मेरा है काम
तेरे ही शान से मेरा है नाम
तू आगरा की शान है
हमारी पहचान है
मन ये मेरा कहना लगा है
गहरा ये वादा मेंने किया है
रातों की हलचल ......
अब बढ़ने लगी है
मेरी ज़िन्दगी जलने लगी है
धूल जिंदगी पर जमने लगी है
शबनम की बूंदे उड़ने लगी है....
तेरा ये दामन छूट रहा है
खुद ख़ुदा भी रुठ गया है
तेरा ये दामन छूट रहा है
तुझको सलाम ..मेरा है काम
तेरे ही शान से मेरा है नाम
तू आगरा की शान है
हमारी पहचान है
तुझको सलाम ..मेरा ये है काम
तेरे ही शान से मेरा है नाम
तू आगरा की शान है
हमारी पहचान है
हमारी पहचान है
हमारी पहचान है

Wednesday, November 16, 2011

मेरी हर गजल दिवानी तेरी



मेरी हर गजल दिवानी तेरी
तुझसे शुरु. तुझपे खत्म कहानी मेरी
तेरी इबादत से ...... जिंदगानी मेरी
करु क्या अब में.. किस्सा तेरा बयां
मेरे लबों पर है.... सिर्फ कहानी तेरी
मेरे दिल में जिक्र हेमशा तेरा
मेरी तो बस .....मेरी कहानी मेरी
दरों शहर तेरा.....अजनबी में
तेरे दर पर खत्म कहानी मेरी
तलब क्या करु तुझसे ......
मेरी हर गजल दिवानी तेरी


Thursday, October 27, 2011

जब कोई ख्याल दिल से टकराता है


जब कोई ख्याल दिल से टकराता है ॥
दिल ना चाह कर भी, खामोश रह जाता है ॥
कोई सब कुछ कहकर, प्यार जताता है॥
कोई कुछ ना कहकर भी, सब बोल जाता है ॥

एक टूटी हुई जंजीर की फरियाद हैं हम
और दुनिया ये समझती है कि आजाद हैं हम

देख लो आज हमको जी भर के
कोई आता नहीं है फिर यहां मर के

अब क्या बताऊं मैं तेरे मिलने से क्या मिला
इरफान-ए-गम हुआ मुझे दिल का पता मिला
जब भी निकलता हूं मैख़ाने से,अकेला नहीं होता
तेरी यादों का पतझड़ मेरे साथ चलता है..

Wednesday, April 13, 2011

एक गीत की वो आवाज़ जो जब किसी हिन्दुस्तानी के कानो मैं पड़ती है तो उसे बड़ा सुकून देती है


एक गीत की वो आवाज़ जो जब किसी हिन्दुस्तानी के कानो मैं पड़ती है तो उसे बड़ा सुकून देती है
भारतीय संगीत की दुनिया मैं बड़े ही अद्व के साथ लिया जाने वाला नाम पण्डित भीमसेन गुरुराज जोशी भारतीय संगीत-नभ के जगमगाते सदा लिए डूवचूका है अब उन्हें प्रत्यक्ष तो सुना नहीं जा सकता, हाँ, उनके स्वर सदियों तक अन्तरिक्ष में गूँजते रहेंगे.
सुर ताल को अपनी आवाज़ मैं बाँध केर गाने वाले पंडित जी अद्भुभूत तरीके से गाते थे अलवेला सन यो रे ,,और ठुमक ठुमक पग कुमत कुञ्ज ,चपल चरण हरी आये सादे पहनावे, रहन-सहन और स्वभाव वाले भीमसेन जी को अपने बारे में कहने में हमेशा संकोच रहा। यह मेरा सौभाग्य ही है पण्डित भीमसेन जोशी ने जहाँ एक ओर अपनी विशिष्ट शैली विकसित करके किराना घराने को समृद्ध किया, वहीँ दूसरी ओर अन्य घरानों की विशिष्टताओं को भी अपने गायन में समाहित किया। उन्होंने राग कलाश्री और ललित भटियार जैसे नए रागों की रचना भी की। उन्हें खयाल गायन के साथ-साथ ठुमरी, भजन और अभंग गायन में भी महारत हासिल थी। पंडित जी ने कई फिल्मो मैं अपनी अनमोल गायन प्रतिभा का योगदान दिया है - 'ठुमक ठुमक पग कुमत कुञ्ज मग, चपल चरण हरि आये ....'I इस फिल्म के संगीतकार जयदेव थे. फिल्म के इस गीत को 1985 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए वर्ष का सर्वश्रेष्ठ गीत (पुरुष स्वर) के रूप में पुरस्कृत किया गया थाI पंडित जी भले ही आज हमारे साथ नहीं हैं लेकिन उनकी मधुर स्वर्णिम आवाज़ हमेशा उनको हमारी आँखों मैं सदा के लिए जिन्दा रखेगी आज पंडित भीमसेन जोशी हमारे बीच मौजूद नहीं। लेकिन उनकी मधुर इस संसार को उनकी हमेसा याद दिलाती रहेगी

इश्क किया चीज़ है ख़बर न थी हमको

इश्क किया चीज़ है ख़बर न थी हमको अब ग़ालिब तेरे शहर ने जीना सिख़ा दिया